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प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी में प्यार की पाठशाला जारी, प्रैक्टिकल पर लगा रोक

इसके विरोध में विश्वविद्यालय के कई वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों ने कॉलेज स्ट्रीट को अवरुद्ध कर दिया

24 Jun 2023

प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी में प्यार की पाठशाला जारी, प्रैक्टिकल पर लगा रोक

कोलकाता। प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वर्ष 2013 में प्रेसिडेंसी में छात्रों के लिये प्यार की पाठशाला की शुरुआत की गयी थी और अब जब छात्र प्यार के पीरियड में पढ़ाई पूरी कर उसे प्रैक्टिकल कर रहे हैं तो विश्वविद्यालय प्रबंधन इसमें राह का रोड़ा बन रहा हैं। प्रेसीडेंसी की शिक्षक अब पुलिस की भूमिका में आ गये हैं और प्यार करने वाले पर निगाह रख रहे हैं और जो निगाह में आया उसके माता-पिता को विश्वविद्यालय बुलाया जा रहा हैं।  प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी में इन दिनों बवाल मचा हुआ है। कारण यह है कि यूनिवर्सिटी कैंपस में प्यार करते स्टेंडूट्स पकड़े जाते हैं, तो उनके माता-पिता को बुलाया जा रहा है। वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई ने इस बाबत यूनिवर्सिटी प्रबंधन को ज्ञापन सौपा है और इस तरह की कार्रवाई बंद करने की फरियाद की है। वहीं, बंगाल का बुद्धिजीवी समाज भी यूनिवर्सिटी प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठाया है। 
छात्र यूनियन ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय के जोड़ों को पुलिस के सामने अपनी सफाई देनी पड़ रही है। जोड़े को देखते ही अधिकारी सक्रिय हो जा रहे हैं। यदि कोई विद्यार्थी प्यार करते हुए पाया जाता है तो प्रबंधन की ओर से गार्जियंस को पत्र भेजा जा रहा है। अभिभावकों को बुलाया जा रहा है। शिकायतें की जा रही हैं। अलग-अलग मामलों में फतवे जारी हो रहे हैं। शुक्रवार की रात जैसे ही यह खबर सामने आई, कॉलेज स्ट्रीट चौराहे पर छात्रों ने हंगामा मचाना शुरू कर दिया है और अब इसे लेकर बंगाल के बुद्धिजीवियों की भी प्रतिक्रिया सामने आने लगी है। घटना को लेकर एक प्रेसीडेंसी के छात्र गुस्से में हैं। परिसर में स्वतंत्र विचार कायम रहें। यह सभी छात्र चाहते हैं। तृणमूल छात्र परिषद के उपाध्यक्ष तनहिक चक्रवर्ती कहते हैं कि प्रेसीडेंसी की स्वतंत्र सोच को बनाए रखें। चाहे वह प्यार में हो, चाहे वह शिक्षा में हो, चाहे वह राजनीति में हो। उन्होंने कहा कि प्रेम, पढ़ाई, राजनीति ये तीन चीजें हमेशा स्वतंत्र विचार के स्थान पर होनी चाहिए। प्रेसीडेंसी उस स्वतंत्र विचार का प्रतीक है, लेकिन, छात्रों के लिए यह देखना भी वांछनीय है कि स्वतंत्र सोच मनमानी में न बदल जाए। इसी तरह, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की जि़म्मेदारी है कि स्वतंत्रता कम न हो। एसएफआई के राज्य सचिव सृजन भट्टाचार्य ने घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। 
उन्होंने कहा कि ये पूरा मामला दरअसल एक साजिश है। क्योंकि छात्र कैंपस में आते हैं, यहीं पर वे एक-दूसरे से दोस्ती करते हैं। उन्होंने कहा कि यही पर छात्र सिस्टम, संस्था पर सवाल उठाना सीखते हैं तो आप हाथ पकड़कर नहीं चल सकते, वास्तव में आप बैठकें और जुलूस नहीं निकाल सकते, यह फतवा के समान है। हालाँकि प्रेसीडेंसी अधिकारियों द्वारा पहले ही सभी आरोपों को ख़ारिज कर दिया गया है। यूनिवर्सिटी के डीन अरुण कुमार मैती कहते हैं, पुलिसिंग नीति का हमारा कोई इरादा नहीं है। हमने कुछ छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ एक परामर्श सत्र आयोजित किया था। यहीं पर विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने एक निजी पल बिताया था। उधर, शिक्षाविद् नृसिंघमप्रसाद भादुड़ी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। 
उनका स्पष्ट दावा है कि प्रेसीडेंसी जैसे संस्थान में प्रेम का द्वार कभी बंद नहीं हो सकता है। कोई भी छात्रों की स्वतंत्रता पर रोक नहीं लगा सकता है। बता दें कि कुछ दिन पहले टीएमसीपी के 4 नेताओं को 'दंडितÓ किया गया था। टीएमसीपी के 2 नेता चालू सत्र के लिए निलंबित किये गये हैं। टीएमसीपी के 4 नेताओं के हॉस्टल में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। वहीं, कुछ दिन पहले तृणमूल छात्र परिषद पर बाहरी लोगों के साथ मिलकर प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी के हिंदू हॉस्टल के निवासियों पर हमला करने का आरोप लगा था। इसके विरोध में विश्वविद्यालय के कई वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों ने कॉलेज स्ट्रीट को अवरुद्ध कर दिया। इसके जवाब में टीएमसीपी ने उन पर हमला करने का आरोप लगाया।
प्रेम में बाधा न डालें प्रेसीडेंसी : मदन मित्रा
दो प्रेमियों के बीच बाधा बन रहे प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के मामले में अब विधायक मदन मित्रा खुलकर सामने आ गये हैं और छात्रों का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि प्यार के बीच में बाधा न बने। मदन मित्रा ने कहा कि क्या छात्रों के अभिभावकों को बुलाकर आप पोर्नोग्राफी दिखायेंगे? उन्होंने कहा कि प्रेसीडेंसी के छात्र भलीभांति जानते हैं कि इस फरमान से कैसे निपटा जाए। मैं बस अपील कर रहा हूं कि प्रेम के बीच में कृपया कर बाधा न बने। उन्होंने कहा कि प्रेम बेहद कठिन विषय है। बंगला की दो पंक्ति कहते हुए कहा कि 'मोरेचे कोलसीर काना ताई बोले कि प्रेम देबो नाÓ अर्थात् घड़ा का किनारा टूट गया तो क्या उसे प्यार नहीं दें? साथ ही उन्होंने कहा कि अगर प्यार को ही बंद कर दिया गया तो विवाह कैसे होगा। विवाह नहीं होगा तो अस्पतालों में प्रसव नहीं होगा और अगर बच्चे ही जन्म न लिये तो स्कूल-कॉलेज में पढऩे कौन जायेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि लड़का-लड़की एक साथ बौटनी, केमिस्ट्री, बॉयोलॉजी के अलावा जियोलॉजी तक की बातें कर सकते हैं, उसमें कोई बाधा नहीं देता तो फिर प्रेम में क्यों? उन्होंने कहा कि प्यार चितरंजन है, प्यार पवित्र है ऐसे में प्यार पर रोक नहीं लगाया जा सकता।

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